Kya Likhe Zindagi Hai Udash:आज सुबह का टाइम है ज़िन्दगी बहुत उदास है ,इतने दिनों से लोकडाउन है | क्या करू क्या न करू कुछ समझ नहीं आ रहा लगता इस दुनिया में अब कुछ है ही नहीं झूट का बोल बाला है पाखंड चरम सिमा पर है अच्छा ज्ञान कोई काम का नहीं माथा मेरा घूम चूका है | इस दुनिया में अब रहने का मन नहीं करता नेता और जाती चरम सिमा पर है | ये लोग आम आदमी और मीडियम क्लास के लोगो को जीना हराम कर रखा है | कौन है वो जो इश्शे छुटकारा दिला सकता है ,क्या वो कोरोना (corona )जैसी माहमारी है जो पूरी मानव जाती को सबक सीखना चाहती है चाहे corona जिस भी रूप में आई हो लेकिन वो हम लोगो से क्या कुछ कहना चाहती है क्या हम क्या हम कोरोना (corona )को समझने में सछम है | क्या हम corona क बारे कुछ समय तक उसके बारे में अकेले में कुछ सोच सकते है ,अगर नहीं तो एक बार सोच के देखिये की हम अपने घरो में क्यू कैद हो गए | हमे कोण डरा रह है पहले तो हमे अपने ही लोग डराते थे ,लेकिन अब कौन सा जीव है जो पूरी दुनिया को डरा रही है ,जो दीखता नहीं अचनाक से पूरी दुनिया में पहली बार क्यू आना पड़ा आज तक पूरी दुनिया में ऐसा पहली बार हुवा क्यू हुवा क्या कोरोना का अशर सिर्फ मानव जाती पर क्यू जानवरो पर क्यू नहीं जंगलो में क्यू नहीं समुन्द्रो में रहने वाले जलिये जीवो में क्यू नहीं सिर्फ और सिर्फ मानव जाती और उनकी बस्तियों में क्यू | संभल जा मानव आज भी समय है जिस दिन यह कोरोना वायरस जैसा जिव अगर हवा में अपना रूप ले लिया उस दिन तुम्हरा अंत होगा | जुल्म करना छोड़ दे है मानव तू दुशरो से जलना छोड़ दे ,तू दुसरो की टांगरी घिचना छोड़ दे क्यू की तूने सभी हदे पार कर दी तू मत अकड़ ,तू घमंड मत कर ,तू धरती का मालिक नहीं है तू सुधर जा ,वो गली गली घूमने लगा है वक्त है सुधरने का फिर न जाने तेरा क्या होगा तुम पुछ लेना उसी से जब वो आएगा तेरे अंदर एक बार दिल से पूछ लेना उसी से ,में न हवा में हूँ न पानी में ,में तो रहूँगा सिर्फ मानव में ,तू सुधर जा हे मानव मेरा रूप है अनेक ,कोरोना CORONA वायरस
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